Vice Chancellor

  • प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र
  • कुलपति


Prof Pradeep Kumar Mishra is currently serving as Vice Chancellor, Dr APJ Abdul Kalam Technical University, Lucknow, UP. He has also served Jharkhand Technical University, Ranchi as Vice Chancellor prior to this. He is former head of the Department of Chemical Engineering and Dean Student affairs at IIT (BHU) Varanasi. He holds Bachelor degree in Chemical Engineering from IIT Roorkee, Masters from IIT Bombay and PhD from IIT (BHU) Varanasi. After brief instinct in Industries Prof Mishra joined teaching at IIT BHU Varanasi in January 1997. He has been placed to HAG scale in 2016 recognizing his academic and R&D contributions. Prof Mishra has published more than 100 papers in SCI journals and filed 6 patents. He has authored/edited more than 20 books and contributed scores of chapters in books/encyclopaedias. He has also successfully completed sponsored research project and consultancy worth more than 20 crores from DST, NSTEDB, CPCB, DBT, AICTE New Delhi, and NCL Singrauli etc.

Prof P K Mishra is actively contributing to the area of Bioenergy and wastewater treatment in addition to biocompatible materials. Looking to his expertise in the area of wastewater and effluent treatment processes, he was appointed Chairman to the committee for formulation of disposal standard to textile industries. He has also been members to two other important committees, which formulated charters for Distilleries and Sugar Industries. Prof P K Mishra and his team at IIT (BHU) Varanasi has been extensively engaged by CPCB for monitoring of majority of GPIS at Ganga Basin from 2018 onwards. Prof Mishra is also member of prestigious Expert Appraisal Committee for Industry-3 of Ministry of Environment, Forest and Climate Change.

In addition to his technical contribution Prof P K Mishra has been pioneer in the field of Innovation, Incubation and Entrepreneurship in Eastern UP and established first Incubator (Malviya Centre for Innovation Incubation and Entrepreneurship) at Banaras Hindu University in 2008, which is the part of IIT (BHU) Varanasi now. He has also established & coordinated the activities of CISCO ThinQubator in association with CISCO and NASSCOM at IIT BHU. He has also coordinated RKVY- RAFTAAR scheme of Ministry of Agriculture, Government of India for promotion of Agri-entrepreneurship in Uttar Pradesh. In association with NCL Singrauli, he was instrumental in setting up incubators in Singrauli, MP also.

Prof Mishra has been decorated with various awards/honours, prominent of them are Dr. V. G. Patel Memorial Award 2020 for Entrepreneurship Trainer/Educator/Mentor (Cash Price-1 Lakh), Dr Shirin Gadhia Memorial Sustainability Award, 2017, 2nd National Prize for book writing in Hindi by Min of Renewable Energy, GOI, 2006 and DST Lockheed Nomination for Technology Commercialization for 2010 and 2012. He has been member board of governors of NISBUD, Min of Skill Development and Children Emancipation Society UK. He has also represented a delegation to Germany on the invitation of German Biogas Association on behalf of Indian Biogas Association. Professor Mishra has also been selected for prestigious Leadership of Academicians Program and successfully completed it at IIT (BHU) and Pen State University, USA in March-April’ 2019. He has also been appointed as Co-Coordinator for 2nd LEAP being organized by the institute in collaboration with Cambridge University, UK. Prof. Mishra has delivered over 100 invited talks in the area of Environment, Energy, Entrepreneurship and Motivation in addition to various field of Chemical Engineering at various forums including Institutions of eminence.

Prof P K Mishra has organized over 50 Conferences/Seminars/Workshops and numerous training programs/summer schools in the area of Energy/Environment/Entrepreneurship in addition to Chemical Engineering. Prof P K Mishra is also helping Municipal Corporation and Jal Nigam by organizing training programs in association with JAICA. Local MSMEs have also benefited immensely with the timely suggestion and consultancy of Dr P K Mishra. Prof Mishra and his group is also working for the preservation of the culture of Varanasi through digitization as web (www.kashikatha.com), which is even referred by Bharat Kosh. Currently Prof Mishra is also in the process of establishing Skill Development Ashrams at three places in Varanasi & Mirjapur of UP.


प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, में विगत 25 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे है। प्रो. मिश्र झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति रह चुके हैं एवं दिनांक 15 जनवरी 2022 से कुलपति, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ का कार्यभार ग्रहण किया है।

प्रो. मिश्र का जन्म अगस्त 1964 में वाराणसी में हुआ और वहीं से प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा भी हुई। प्रो. मिश्र ने 1986 में प्रतिष्ठित रूड़की विश्वविद्यालय से रासायनिक अभियांत्रिकी में स्नातक, 1988 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई से परास्नातक तथा 1995 में प्रौद्योगिकी संस्थान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से चक्रवर्ती की उपाधियां अर्जित कीं।

कुछ वर्षों तक औद्योगिक कलकारखानों में सेवा देने के पश्चात् प्रो. मिश्र ने 1997 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से अध्यापन प्रारम्भ किया। आप 2010 में पूर्ण प्रोफेसर तथा 2016 में उच्चतम समूह के प्रोफेसर के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

आपने अपने शिक्षण के काल में अब तक 100 से ज्यादा एससीआई पब्लिकेशन, दो दर्जन किताबो तथा अनेकानेक तकनीकी अध्याय लिखे हैं। प्रो. मिश्र के 06 पेटेंट भी हैं। प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने लगभग सभी प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रोजेक्ट एवं कंसल्टेंसी पूरे किए हैं, जिनका मूल्य रू.20 करोड़ से भी ज्यादा है। प्रो. मिश्र ने जैव ऊर्जा और जल प्रदूषण निवारण में विशेष अहर्ता अर्जित की है।

प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र के निर्देशन में दो दर्जन छात्रों की चक्रवर्ती तथा 50 से ऊपर छात्रों के परास्नातकशोध पूर्ण हो चुके हैं। आपने विभिन्न देशों यथा जर्मनी, अमेरिका, दुबई इत्यादि की यात्रा शोध एवं प्रशिक्षण के लिए किया है।

प्रो. मिश्र को केंद्रीय प्रदूषण संघटन, नई दिल्ली ने कई महत्वपूर्ण समितियों का सदस्य एवं अध्यक्ष मनोनित किया है। प्रो. मिश्र, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अति महत्वपूर्ण समिति, एक्सपर्ट अप्रेजल समिति, इंडस्ट्री-III के भी सदस्य हैं। आपने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण कार्यक्रम लीप में भी सहभागिता की है और पेन स्टेट विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण किया है। प्रो. मिश्र ने अनेको पुरुस्कार अर्जित किए हैं, जिनमें मुख्य हैं, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद का वर्ष 2020 का प्रतिष्ठित वीजी पटेल स्मृति उद्यमिता प्रशिक्षक पुरस्कार, 2017 का प्रतिष्ठित शिरीन गढ़िया स्मृति पर्यावरण पुरस्कार तथा नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय का वर्ष 2005 का हिंदी पुस्तक लेखन के लिए द्वितीय राष्ट्रीय पुरस्कार। आप निस्बद, एमएसएमई, भारत सरकार के बोर्ड ऑफ गवर्नर के सदस्य रहे हैं। आप प्रोजेक्ट माला (Children Emancipation Society UK) के सदस्य हैं। उद्यमिता प्रशिक्षण में आपने 2004 से ही अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आप मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र, वाराणसी के सचिव हैं। भारतीय संस्कृति खास कर काशी की संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार के लिए आपने काशी कथा डॉट कॉम नामक एक वेबसाइट का भी निर्माण किया हैं। प्रसन्नता की बात है की भारत कोष में काशी से जुड़ी जानकारी के लिए काशी कथा डॉट कॉम को संदर्भित करता है। सम्प्रति प्रो. मिश्र अपने शिक्षण कार्य के साथ साथ समाज में उद्यमिता और प्रशिक्षण कार्य को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी और मिर्जापुर में तीन केंद्रों की स्थापना में जुटे हैं।